पुकार – Inner Voice of an Indian Girl

जब हुई मे पेदा,
खुशी मनाये या आंसु,
सोच मे पड गये लोग |
ईशवर ने बचा लिया मुझे,
कुछ अचछे थे संजोग |

काश ! तुमहे एक लडका होता ,
दुनिया सारी ये केहने लगी,
सेकड़ो ताने मेरी माँ सेहने लगी |

जेसे होने लगी मे बड़ी,
देखा मेने;
सामने थी हज़ारो दिवारे खड़ी |
एक-एक दिवार पर चढ़ना था,
मुझको भी आगे बढ़ना था |

कयु डरते हे मुझसे, मेरे अपने,
मेरे खुद के भी हे थोडे सपने !
अपनो मे भी कहा दम था,
सोचा, लड़की होना ही जुमँ था..!

अज़ीब हे ये दुनिया वालें ,
काँच की तरह तुट जाते हे ,
टुकडो टुकडो मे होके ,
दुसरो को चुभ जाते हे.

कमजोर नही हुं मे ,
यु बोहोत अरमान बनाये बेठी हुं ,
ना डर हे किसी का,
सिफँ अपनो का सनमान सजाये बेठी हुं….|

[Photo Courtesy: Sunrise The Film]

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Dharmraj Thakor
Dharmraj Thakor is a Surti guy; a fresh Civil Engineer and aspiring to masterise in the same. He loves cricket and travelling. He likes writing poems and love sharing quotes. Dharmraj thinks, behind every smile there is some amount of motivation and he likes doing more of that.

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